Tuesday, August 24, 2010

"प्यार " एक ऐसा एहसास

मेरे बोलों को तुम अपनी रवानी दे दो !!!
कुछ तो कहेगा दिल ये गर तलब इसे हुई,
ये बात और है कि तुम सुनो या ना सुनो,
मस्ती फिजां की देख के बहकेगा दिल ज़ुरूर,
बहके हुए इस दिल को तुम चुनो या ना चुनो!!

न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिल नवाज़ी की,
न तुम मेरी तरफ़ देखो ग़लत अंदाज़ नज़रों से,
न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों में,
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से!!!

"प्यार " एक ऐसा एहसास, एक ऐसी भावना जिसका सिर्फ़ जिक्र किया जाए तो ये सारी जिंदगी कम है। प्यार ऐसी भावना जिसके नाम हम अपनी हर एक साँस भी लिख दे तो वो भी कम है। परंतु सबसे ज्यादा समस्या भी प्यार में उत्पन्न होती है। सबसे ज्यादा दिल भी प्यार में ही टूटते हैं। हम किसी से दिलोजान से प्यार करते हों वो हमें अचानक छोड़ दे, तो ऐसी स्थिति में जिन्दगी बेमानी लगने लगती है।"


माना कि बाहों में हो फूल सदा ,
ये जरूरी तो नही ।
काँटों का दर्द भी ,
कभी तो सहना होगा।
राहों में छाव हो सदा,
ये जरूरी तो नहीं।
धुप की चुभन में,
कभी तो रहना होगा ।
हंसी खिलती रहे सदा ,
ये जरूरी तो नहीं।
पलकों पर जमे अश्को को,
कभी तो बहना होगा।
हर पल रहे खुशनुमा सदा,
ये जरूरी तो नहीं,
थम सी गयी है जिन्दगी,
कभी तो कहना होगा।
पर तुम्हें खुश रहने की कोशिश तो करना होगा |

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